Friday, August 14, 2009

पन्द्रह अगस्त, बारिश और संगीता पुरी

संगीता पुरी नये ब्लागर की हौसला अफजाई तो करती ही है, इनकी मौसम की भविष्यवाणिया सटीक होती है. एक ओर जहां मौसम विज्ञानी अपनी गलत अनुमानों लतियाये जा रहे है वही संगीता पुरी की मौसम भविष्यवाणिया सही सिद्ध हो रहीं है

10 अगस्त को बेहद गर्मी और वर्षा के नामोनिशान न होने पर संगीता पुरी की यहां 15 अगस्त से बारिश होने की भविष्यवाणी पढ़ी

मैं इस भविष्यवाणी के प्रति पूरा आश्वस्त था, यहां तक कि मंगलवार को अपने लिये एक नई छतरी भी ले आया.

आज पन्द्रह अगस्त को इस छतरी के नीचे छमाछम बरसात का आनंद ले रहा हूं

क्या आपके यहां भी बारिश हो रही है?

Friday, December 5, 2008

लीजिये अमेरिका ने हमलों में पाकिस्तान के खिलाफ सबूत दे दिये.


अब तक पाकिस्तान अपना बेशर्मी से अपना सीना चौड़ा करके कह रहा था कि हमारे नागरिक मुम्बई के हमलों में शामिल नहीं है, या हमारे खिलाफ कोई सबूत नहीं है, या ब्ला ब्ला ब्ला ब्ला

अभी तक आतंकवादी हमलों में सिर्फ हिन्दुस्तानी लोग मरते रहे थे. अब हिन्दुस्तानी का मरना क्या और जीना क्या. हये, हये मौत तो अमेरिकी लोगों की होती है, उनकी मौत की बात ही कुछ और होती है.

तो भईया इस हमले में अब अमेरिकी और इजरायली भी मर गये.अमेरिकी और इजरायली मरे तो अमेरिका चेता,अमेरिका चेता तो अमेरिका ने जांच की, अमेरिका ने जांच की तो अमेरिका के हाथ सबूत लगे.

ज्जे देखो सबूत
पक्के सबूत थे,हिन्दुस्तान ने नहीं बल्कि अमेरिका ने दिये थे सो पाकिस्तान ने भी गर्दन नीची करके मान लिया है कि हां आतंकवादी पाकिस्तानी आदमी ही थे

अमेरिकी रक्षा प्रमुख ने भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम.के.नारायणन और रक्षा मंत्री ए.के.एंटनी को भी पाकिस्तान के खिलाफ ये सारे सबूत सौंप दिये हैं. अमेरिका ने यह भी बता दिया है कि पाकिस्तानी खुफिया एजंसियों ने लश्कर-ए-तईबा का हाथ होने की बात मान ली है.
इन सबूतों के आधार पर भारत में पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार किया है. मुंबई पर आतंकवादी हमले के सिलसिले जम्मू कश्मीर पुलिस के एक कॉन्सटेबल को गिरफ्तार किया गया है.इस कॉन्सटेबल का नाम मुख्तार अहमद है.दूसरा व्यक्ति तौसिफ रहमान है,जिसे पश्चिम बंगाल से पकड़ा गया है.

चलते चलते यह भी सुन लीजिये कि विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस ने कल गुरुवार को पाकिस्तान को हुक्म सुना दिया है कि जमात-उद-दावा के फाउंडर हफीज़ सइद को गिरफ्तार किया जाए।

और हां, अपने अमरसिंह भईया कहां है, कुछ मालूम है क्या आपको?

Monday, December 1, 2008

अगर ये संदीप उन्नीकृष्णन का घर नहीं होता तो एक कुत्ता भी वहां नहीं जाता


वैसे तो कम्युनिष्टों की नजर में देश की कीमत कुछ भी नहीं होती. इनके लिये चीन और रूस में बैठे अपने आकाओ का हुक्म के आगे देश क्या चीज है. उस पर आजकल नेताओं का दिमाग पहले से ही हिला हुआ है सो केरल के चीफ मिनिस्टर बुढऊ वी एस अच्युतनन्दन का दिमाग कैसे काबू में रहता?

कल जब शहीद मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के पिता ने उन्हें अपने बेटे के नाम पर राजनीति चमकाने के आरोप में घर में नहीं घुसने दिया तो बुढऊ वी एस अच्युतनन्दन का एकदम पाजामा फाड़कर पगला जाना एकदम स्वाभाविक था, सो पगला गये.

अपने पागलपन में बुढऊ वी एस अच्युतनन्दन ने फरमाया कि अगर वह संदीप का घर नहीं होता तो कोई कुत्ता भी वहां नहीं जाता.

संभालो बुढऊ वी एस अच्युतनन्दन, अपने साथ पाटिलों, नकवियों और देशमुखों को अपने साथ लेकर थोड़ा आगरा घूम आओ. मर्ज गंभीर है लेकिन शायद सबकी तबियत थोड़ा थोड़ा सुधार जाये.

वैसे मेरे ढाबे वाले सरदार गुरनाम सिंघ का कहना है कि बाउजी, ये पार्टी तो नेताजी सुभाष बोस तक के बारे में अनाप शनाप बकती रही, जो चाइना भारत युद्ध के समय देशद्रोह करके चाइना का फेवर करे उससे और क्या उम्मीद कर सकते हो. ये नहीं सुधरने के.
आपका क्या ख्याल है?

Saturday, September 27, 2008

दिल्ली में महरौली में बम फटा

दिल्ली में महरौली में भीड भाड़ वाले इलाके फ्लावर मार्केट में बम फटा
कितने हताहत हुये है, कितने मरे पता नहीं

अभी चैनलों के न्यूज जाकी आपको बता रहे हैं.
यही न्यूज जाकी पुलिस की लापरवाही पर चीखेंगे, चिल्लायेंगे
पुलिस को नपुंसक कहेंगे, लाशें दिखायेंगे, मुरदों से भी पूछेगें कि मर कर कैसा लग रहा है

फिर जब कोई पुलिस वाला आतंकवादी को गिरफ्तार करते समय जान दे देगा तो
यही न्यूज जाकी आतंकवादियों के मानवाधिकार पर बातें करेंगे

http://www.ibnlive.com/news/blast-in-delhis-mehrauli-area-five-killed/74473-3.html
http://www.ndtv.com/convergence/ndtv/default.aspx

रघुपति राखव राजा राम
पतित पावन सीताराम

Tuesday, September 23, 2008

जामिया के वीसी के नाम एक छोटा सा पत्र

जनाब मशीरुल हसन साहब
सादर चरण स्पर्श,
मुझे को ये जानकर बहुत खुशी हुई कि आप अपने स्टूडेन्टों का कितना ध्यान रखते हैं. रखना ही चाहिये लेकिन मेरे कुछ प्रश्न हैं

1. यदि जामिया मिल्लिया इस्लामिया का कोई लड़का सड़क पर जेब काटता पकड़ा जाता तब भी आप उसका इसी तरह साथ देते?
2. यदि जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुछ छात्र आपकी ही यूनिवर्सिटी की छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार में लिप्त पाये जाते तब भी आप उसे अपनी यूनिवर्सिटी से रेस्टीकेट करने के बजाय उन बलात्कारी बच्चों का साथ देते? अभिभावक की तरह, जैसे इस आतंकवादियों के साथ हैं?

जबाब देंगे क्या?
आपका
सुमो

Wednesday, September 17, 2008

हिन्दुस्तान में सब चोर उचक्के हैं और चीन में सब ईमानदार!

विचारमंथन नाम के ब्लाग में आज चीन देश की ईमानदारी के बारे में एक सत्य (?) घटना पर आधारित एक कहानी छपी है कि कैसे चीन खूबसूरत है, वहां के बाशिन्दे खूबसूरत हैं, खूबसूरत ही नहीं है बेहद ईमानदार है, जमीन पर पड़ा 5 RMB का नोट नहीं उठाते जबकि इतनी धनराशि के लिये "अपने हिन्दुस्तान मे तो इतने पैसो मे कत्ल हो जाये, सरकारे गिर जाये और न जाने क्या-क्या हो जाये. "

बहुत से लोगों को अपनी साड़ी में लिपटी सिधी साधी मां की जगह पडौस की छमकछल्लो अधिक पसंद आती है. किसी गपोड़ शंख ने लिख दिया और भाई बिना सोचे बिचारे ले उड़े और छाप दिया. अब मौका मिला है तो गरिया दो अपने भारत को, हिन्दुस्तानियों को. कौन बेबकूफ जायेगा यह सब सत्यापित करने?

लेकिन भाई मेरे हिन्दुस्तान को गरियाने से पहले नेट पर जरा चीन के भ्रष्टाचार के बारे में पता तो कर लेते

यहां पर विश्व भाई ने लिखा है कि "किसी वर्ग को पूरी तरह दबाने के लिये जरूरी है उसका आत्मसम्मान खत्म कर देना. जब अपने लिये खुद के दिल में ही सम्मान न हो तो बहुत मुश्किल है किसी दूसरे के हाथों अपना अपमान रोकना." जब कोई अपना आत्मसम्मान खुद मिटा चुका हो तो इनका भगवान भी मालिक नहीं है.

आप जाने से पहले चीन की सड़कों पर क्या होता है, ये वीडियो देख लीजिये फिर खुद फैसला कीजिये कि क्या हिन्दुस्तान में सब चोर उचक्के हैं और चीन में सब ईमानदार. देखिये कि कैसे सड़कों पर बच्चों के खाने के टिफिन लुट जाते हैं, कैसे राह चलते लोगों के लुटाई होती है.




Robbery in China - Free videos are just a click away

मैंने विरोध स्वरूप उस ब्लाग पर तिप्पणी की थी जो माडरेट नहीं की गई इसलिये तल्ख शब्दों में यह पोस्ट लिख रहा हूं

मैं, मेरा देश, मेरे देशवासी भी उतने ईमानदार और बेईमान हैं जितने किसी और देश के, न वो स्वर्ग से उतर कर आये हैं न हम मोरी के कीड़े हैं.

Monday, September 15, 2008

सर्वसम्माननीय पाटिल साहब की मुश्किल समझने की कोशिश कीजिये

लोग हमारे सर्वसम्माननीय शिवराज पाटिल की मुश्किल समझने की कोशिश नहीं कर रहे बस कपड़े बदलने की रट लगाये जा रहे हैं. अरे भई इनकी कुछ मुश्किलें है. समझने की कोशिश कीजिये ना

दरअसल पाटिल साहब एक नंगे आदमी है, और नंग को हमेशा ये लगता है कि कहीं दूसरा उसे देख कर क्या समझेगा सो इसीलिये बार बार अपने नंग पने को छुपाने के लिये कपड़े बदलते रहते हैं

इन सर्वसम्माननीय पाटिल की मुश्किल समझने की कोशिश कीजिये

बहरहाल कांग्रेस शिवराज पाटिल को हटाने जा रही है और आज सुबह हुई आतंकवाद के ऊपर मंत्रिमंडल की बैठक में सर्वसम्माननीय पाटिल को नहीं बुलाया गया था.

विश्वास कीजिये, आने वाले 10 अक्टूबर से पहले शिवराज पाटिल गृहमंत्री की कुर्सी से हटा दिये जायेंगे।